दिल्ली में तलाक और पारिवारिक मामलों के वकील
समीक्षा: एडवोकेट आयुष अग्रवाल · अंतिम समीक्षा
एडवोकेट आयुष अग्रवाल बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में पंजीकृत (D/6955/2018) हैं और दिल्ली के दंपतियों को तलाक, बच्चों की कस्टडी, भरण-पोषण और घरेलू हिंसा के मामलों में सलाह देते हैं।
संक्षिप्त उत्तर
दिल्ली में तलाक की याचिकाएं छह जिला न्यायालय परिसरों के फैमिली कोर्ट में सुनी जाती हैं: तीस हजारी, कड़कड़डूमा, पटियाला हाउस, साकेत, द्वारका और रोहिणी। कौन-सा परिसर आपका मामला सुनेगा, यह इस पर निर्भर करता है कि पति-पत्नी आखिरी बार कहाँ साथ रहे या दूसरा पक्ष कहाँ रहता है।
कॉल करने से पहले जाँचें: बार काउंसिल ऑफ दिल्ली नामांकन D/6955/2018 · पूरी प्रोफ़ाइल (अंग्रेज़ी)
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दिल्ली से जुड़ी खास बातें
- मध्यस्थता: हर परिसर में अदालत से जुड़ा मध्यस्थता केंद्र है, और दिल्ली हाईकोर्ट का अपना मध्यस्थता केंद्र (समाधान) है। वहाँ हुआ समझौता आपसी सहमति की डिक्री बन सकता है।
- संपत्ति: समझौते में फ्लैट का मालिकाना हक, होम लोन और स्त्रीधन को अलग-अलग और स्पष्ट रूप से तय करना ज़रूरी है।
- दूसरे राज्यों में हुई शादी: दिल्ली में रहने वाले कई दंपतियों की शादी कहीं और हुई होती है, इसलिए सही अदालत तय करना ज़रूरी है।
- अपील और रिट: दिल्ली हाईकोर्ट में।
पहले कदम
- संदेश भेजने या पैसे इधर-उधर करने से पहले वकील से बात करें।
- विवाह, पहचान, आय और संपत्ति के कागज़ इकट्ठा करें।
- आपसी सहमति या विवादित तलाक, सही रास्ता चुनें।
- भरण-पोषण, कस्टडी या निवास के अंतरिम आदेश की ज़रूरत हो तो जल्दी आवेदन करें।
निःशुल्क कानूनी सहायता
दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और हर परिसर के जिला विधिक सेवा प्राधिकरण निःशुल्क कानूनी सहायता देते हैं; महिलाएं और बच्चे आय की परवाह किए बिना इसके पात्र हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दिल्ली में मेरा तलाक का केस कौन-सी अदालत सुनेगी?
उस जिले का फैमिली कोर्ट जहाँ आप आखिरी बार साथ रहे थे या जहाँ दूसरा पक्ष रहता है। पते का इतिहास बताने पर सही परिसर की पुष्टि की जा सकती है।
क्या मध्यस्थता अनिवार्य है?
वैवाहिक मामलों में अदालतें पहले सुलह की कोशिश करती हैं और अक्सर मध्यस्थता के लिए भेजती हैं। समझौते को प्रोत्साहित किया जाता है, लेकिन आपको समझौते के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
क्या ऑनलाइन सलाह ली जा सकती है?
हाँ। पहली बातचीत फोन, व्हाट्सएप या वीडियो पर हो सकती है।
क्या आप दिल्ली की अदालतों में पेश होते हैं?
एडवोकेट आयुष अग्रवाल बार काउंसिल ऑफ दिल्ली में पंजीकृत हैं; अधिवक्ता अधिनियम की धारा 30 के तहत पंजीकृत अधिवक्ता देश भर की अदालतों में प्रैक्टिस कर सकते हैं।
यह पेज सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है, आपके मामले की कानूनी सलाह नहीं। हर मामला उसके तथ्यों पर निर्भर करता है।