मेरठ में तलाक और पारिवारिक मामलों के वकील
समीक्षा: एडवोकेट आयुष अग्रवाल · अंतिम समीक्षा
मेरठ जिले के वैवाहिक मामले मेरठ न्यायक्षेत्र के फैमिली कोर्ट में सुने जाते हैं, और अपील तथा रिट याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट (प्रयागराज) में जाती हैं। एडवोकेट आयुष अग्रवाल का मेरठ कार्यालय जागृति विहार एक्सटेंशन-11 में है।
संक्षिप्त उत्तर
मेरठ में तलाक की याचिका फैमिली कोर्ट मेरठ में दायर होती है, यदि विवाह यहाँ हुआ हो, पति-पत्नी आखिरी बार यहाँ साथ रहे हों, प्रतिवादी यहाँ रहता हो, या याचिका दायर करने वाली पत्नी यहाँ रहती हो (हिंदू विवाह अधिनियम, धारा 19)। कौन-सा कानून लागू होगा, यह पति-पत्नी के धर्म पर निर्भर करता है।
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मेरठ में तलाक के मुख्य रास्ते
- आपसी सहमति से तलाक (धारा 13B): कम से कम एक साल अलग रहने के बाद दोनों मिलकर याचिका दायर करते हैं। गुजारा भत्ता, बच्चों की कस्टडी और स्त्रीधन की शर्तें पहले लिखित में तय कर लेनी चाहिए।
- विवादित तलाक (धारा 13): क्रूरता, दो साल से अधिक परित्याग जैसे आधारों पर। इसमें सबूत और गवाहों की जिरह होती है, इसलिए अधिक समय लगता है।
- भरण-पोषण: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 (पुरानी सीआरपीसी धारा 125) के तहत, या केस चलने के दौरान हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत।
मध्यस्थता और निःशुल्क कानूनी सहायता
मेरठ जिला न्यायालय में मध्यस्थता केंद्र है और लोक अदालतों में भी कई वैवाहिक और भरण-पोषण के मामले सुलझते हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ निःशुल्क कानूनी सहायता देता है; महिलाएं और बच्चे आय की परवाह किए बिना इसके पात्र हैं।
ज़रूरी कागज़
- विवाह प्रमाणपत्र या शादी का कार्ड और फोटो
- दोनों पक्षों के पहचान और पते के प्रमाण
- आय के प्रमाण (वेतन पर्ची, आयकर रिटर्न)
- घटनाओं का तारीखवार विवरण
मेरठ कार्यालय
जीएफ-271/5, जागृति विहार एक्सटेंशन-11, मेरठ, उत्तर प्रदेश 250004 · फोन / व्हाट्सएप: +91 90450 08046
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मेरठ में तलाक की याचिका कहाँ दायर होगी?
फैमिली कोर्ट, मेरठ में, यदि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 19 की कोई शर्त मेरठ से जुड़ी हो, जैसे विवाह यहाँ हुआ हो या पति-पत्नी आखिरी बार यहाँ साथ रहे हों।
फैसले के खिलाफ अपील कहाँ होगी?
मेरठ के फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट (प्रयागराज) में होती है। अपील की समय-सीमा कम होती है, इसलिए तुरंत सलाह लें।
क्या मध्यस्थता से समझौता हो सकता है?
हाँ। अदालत कई मामले मध्यस्थता केंद्र भेजती है, और वहाँ हुआ समझौता आपसी सहमति के तलाक में बदला जा सकता है।
क्या मुझे निःशुल्क कानूनी सहायता मिल सकती है?
विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 के तहत महिलाएं और बच्चे आय की परवाह किए बिना निःशुल्क कानूनी सहायता के पात्र हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मेरठ से संपर्क करें।
यह पेज सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है, आपके मामले की कानूनी सलाह नहीं। हर मामला उसके तथ्यों पर निर्भर करता है।